भारतीय संस्कृति में वृक्षों और पौधों को देवतुल्य स्थान प्राप्त है। उनमें भी बेलपत्र यानी बेल (Aegle marmelos) का पत्ता न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक महत्व भी अत्यधिक है। बेलपत्र त्रिदल होता है, और इसका विशेष स्थान भगवान शिव की पूजा में है। इस लेख में हम बेलपत्र के धार्मिक, औषधीय और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से समझेंगे। 1. बेलपत्र का धार्मिक महत्व बेलपत्र का नाम लेते ही सबसे पहले भगवान शिव की छवि मन में उभरती है। पुराणों में वर्णित है कि जो व्यक्ति बेलपत्र से शिव की पूजा करता है, उसे कई जन्मों का पुण्य प्राप्त होता है। शिवपूजन में बेलपत्र क्यों? त्रिदल बेलपत्र त्रिदेवों – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – का प्रतीक है। यह तीन गुणों – सत्व, रज और तम – को भी दर्शाता है। शिव को यह पत्र अर्पण करने से तीनों दोषों से मुक्ति मिलती है। बेलपत्र अर्पण की शुद्ध विधि पूजा में बेलपत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है: “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बेलपत्रं शिवप्रियं॥” इसका अर्थ है – त्रिदलयुक...
Neem: करिश्माई ढंग से फायदा करता है नीम- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)
करिश्माई ढंग से फायदा करता है नीम- जाने Acharya Balkrishan Ji (Patanjali) के विचार
नीम का परिचय (Introduction of Neem)
नीम के पेड़ ,से शायद ही कोई अपरिचित हो। नीम को उसके कड़वेपन के कारण जाना जाता है। सभी लोगों को पता होगा कि कड़वा होने के बाद भी नीम स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता है, लेकिन नीम के फायदे क्या-क्या हैं या नीम का उपय़ोग किन-किन रोगों में कर सकते हैं, इस बात की पूरी जानकारी आपको नहीं होगी। नीम के गुणों के कारण इसे धरती का कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। आमतौर पर लोग नीम का प्रयोग घाव, चर्म रोग में फायदा लेने के लिए करते हैं लेकिन सच यह है नीम के फायदे अन्य कई रोगों में भी मिलते हैं।
नीम के पत्ते का काढ़ा घावों को धोने में कार्बोलिक साबुन से भी अधिक उपयोगी है। कुष्ठ आदि चर्म रोगों पर भी नीम बहुत लाभदायक है। इसके रेशे-रेशे में खून को साफ करने के गुण भरे पड़े हैं। नीम का तेल टीबी या क्षय रोग को जन्म देने वाले जीवाणु की तीन जातियों का नाश करने वाले गुणों से युक्त पाया गया है। नीम की पत्तियों ,का गाढ़ा लेप कैंसर की बढ़ाने वाली कोशिकाओं की बढ़ने की क्षमता को कम करता है। आइए जानते हैं कि आप किन-किन रोगों में नीम का उपयोग कर सकते है और नीम के नुकसान क्या होते हैं।
नीम क्या है? (What is Neem?)
नीम (Neem Ka Ped) भारतीय मूल का एक पूर्ण पतझड़ वृक्ष है जो 15-20 मीटर (लगभग 50-65 फुट) की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। कभी-कभी 35-40 मीटर (115-131 फुट) तक भी ऊंचा हो सकता है। इसकी शाखाएं यानी डालियाँ काफी फैली हुई होती हैं। तना सीधा और छोटा होता है और व्यास में 1.2 मीटर तक पहुँच सकता है।
इसकी छाल कठोर तथा दरारयुक्त होती है और इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। 20-40 सेमी (8 से 16 इंच) तक लंबी पत्तियों की लड़ी होती है जिनमें, 20 से लेकर 31 तक गहरे हरे रंग के पत्ते (neem leaves) होते हैं। इसके फूल सफेद और सुगन्धित होते हैं। इसका फल चिकना तथा अंडाकार होता है और इसे निबौली कहते हैं। फल का छिलका पतला तथा गूदे तथा रेशेदार, सफेद पीले रंग का और स्वाद में कड़वा-मीठा होता है। इसकी गुठली सफेद और कठोर होती है जिसमें एक या कभी-कभी दो से तीन बीज होते हैं।
नीम के औषधीय गुण और प्रयोग विधि (Medicinal Benefits of Neem in Hindi)
नीम को निम्ब भी कहा जाता है। कई ग्रन्थों में वसन्त-ऋतु (विशेषतः चैत्र मास मतलब 15 मार्च से 15 मई) में नीम के कोमल पत्तों (Neem Ke Patte Ke Fayde In Hindi) के सेवन की विशेष प्रंशसा की गई है। इससे खून साफ होता है तथा पूरे साल बुखार, चेचक आदि भयंकर रोग नहीं होते हैं।
नीम के औषधीय गुण कौन से हैं?
नीम कई औषधीय गुणों से भरा हुआ है, जिसके कारण उसका इस्तेमाल सदियों से चला आ रहा है। नीम में एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीवायल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इसके अलावा इसमें कई और भी गुण पाए जाते हैं, जिसका जिक्र आगे के लेख में किया गया है। नीम का असर इतना प्रभावशाली होता है कि यह सांप के जहर के असर को भी कम कर सकता है।
नीम की पत्तियों के फायदे क्या है?
नीम की पत्तियों के कई फायदे हैं, कई तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। नीम की पत्तियों के फायदे निम्नलिखित है:-
एक रिसर्च में पता चला है की नीम के पत्तियों में एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो फेफ्ड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले रोग यानी पल्मोनरी इन्फलेमेशन के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव दिखाता है। यह अस्थमा के रोगियों के लिए भी आयुर्वेदिक औषधिक के रूप में काम करता है।
डायबिटीज में नीम की पत्तियों के फायदे
एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित रिसर्च से जानकारी मिली है की नीम हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव को दिखाता है, जो ब्लड शुगर कम करने की प्रक्रिया है। इसके साथ ही नीम की पत्तियों में एंटी-हाइपोग्लाइसेमिक गुण पाए जाते हैं। यह आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। यदि आप शुगर कि दवाओं को पहले से ले रहे हैं, तो नीम की पत्तियों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
मलेरिया के इलाज में नीम के फायदे
नीम की पत्तियों में एंटीमलेरियल गुण पाए जाते हैं, जो मलेरिया में बहुत उपयोगी साबित होते हैं। ऐसे में रोगी को मलेरिया के इलाज के साथ नीम की पत्तियों के घरेलू उपाय को भी किया जा सकता है। इसके उपयोग के बारे में पूछने के लिए डॉक्टर से सलाह आवश्य लें।
पेट के लिए नीम के कई फायदे हैं
कई सालों से नीम का उपयोग आयुर्वेदिक औषधी के रूप में किया जाता रहा है। यह पेट के अल्सर और कई तरह के गैस्ट्रिक समस्याओं में उपयोग किया जाता है। साथ ही यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
रैशेज और घाव के लिए नीम के फायदे
नीम का उपयोग त्वचा रोग में बहुत फायदेमंद माना जाता हैं। प्राचीन काल से ही शरीर पर कटे या घाव को ठीक करने के लिए नीम का उपयोग औषधी के रूप में किया जाता रहा है। यह आपके घाव को जल्दी भरने में मदद करता है और शरीर को बैक्टीरिया से बचाता है
नीम लीवर और हार्ट के लिए लाभकारी होता है
नीम का पत्ता लिवर को डिटॉक्स करने के लिए अच्छा माना जाता है। यह आपके खराब कॉलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है और अच्छे कॉलेस्ट्रोल को बढ़ाने में प्रभावी होता है। यह आपके हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक है, जिसके कारण हार्ट फेलियोर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है।
नीम की पत्तियां बालों के लिए भी बहुत उपयोगी होती हैं
बालों की समस्या को दूर करने के लिए आप नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर पी सकते हैं। यह बालों को झड़ने से रोकती है, रूसी से बचाव करती है, बालों को सफेद होने से बचाती है और एलर्जी से आपको दूर रखती है। इसके अलावा यह आपको घने, मजबूत, लंबे और चमक्दार बाल पाने में सहायता करती है।
इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है
नीम की पत्तियां आपके शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाती है। सुबह खाली पेट आप नीम की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं। आप इसे पानी में उबाल कर भी पी सकते हैं, जो आपको प्राकृतिक रूप इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
मुहांसों में नीम के फायदे
नीम आपके चेहरे पर मौजूद मुंहांसे को भी दूर करने का काम करती है। आप नीम के पेस्ट को चेहरे पर इस्तेमाल कर सकते हैं। यह आपके चेहरे से बैक्टीरिया और तेल को हटाने में मदद करता है, जो मुहांसों को बढ़ावा देते हैं। नीम में एंटी-एजिंग गुण भी पाए जाते हैं।
ओरल हेल्थ के लिए नीम के फायदे
नीम का उपयोग आपके मुंह के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह आपके मुंह और मसूड़ों के सूजन की स्थिति को ठीक करने में सहायक है। मसूड़ों से खून आना, दांतों का खराब होना, इत्यादि में नीम फायदेमंद हो सकता है। आप नीम के दातून का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
नीम की पत्ती कितनी खानी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि, कोई भी व्यक्ति एक दिन में 6 से 8 नीम की पत्तियों का सेवन कर सकता है। हालांकि, आवश्यक्ता से ज्यादा सेवन नीम के दुष्प्रभाव भी उत्पन्न कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
उपरोक्त जानकारी सिर्फ आपके संदर्भ के लिए दी गई है। ज्यादा जानकारी के लिए कृपया डॉक्टर से संपर्क करें.
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