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"बेलपत्र: शिव भक्ति से स्वास्थ्य तक का पवित्र,or belpatra ke fayde

  भारतीय संस्कृति में वृक्षों और पौधों को देवतुल्य स्थान प्राप्त है। उनमें भी बेलपत्र यानी बेल (Aegle marmelos) का पत्ता न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक महत्व भी अत्यधिक है। बेलपत्र त्रिदल होता है, और इसका विशेष स्थान भगवान शिव की पूजा में है। इस लेख में हम बेलपत्र के धार्मिक, औषधीय और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से समझेंगे। 1. बेलपत्र का धार्मिक महत्व   बेलपत्र का नाम लेते ही सबसे पहले भगवान शिव की छवि मन में उभरती है। पुराणों में वर्णित है कि जो व्यक्ति बेलपत्र से शिव की पूजा करता है, उसे कई जन्मों का पुण्य प्राप्त होता है। शिवपूजन में बेलपत्र क्यों? त्रिदल बेलपत्र त्रिदेवों – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – का प्रतीक है। यह तीन गुणों – सत्व, रज और तम – को भी दर्शाता है। शिव को यह पत्र अर्पण करने से तीनों दोषों से मुक्ति मिलती है। बेलपत्र अर्पण की शुद्ध विधि पूजा में बेलपत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है: “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बेलपत्रं शिवप्रियं॥” इसका अर्थ है – त्रिदलयुक...

Home Remedies for Diabetes: डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

 Home Remedies for Diabetes: डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय





डायबिटीज चयापचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा का स्तर होता है। उच्च रक्त शर्करा के लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, प्यास लगना और भूख में वृद्धि होती है। यदि इसका उपचार न किया जाए तो डायबिटीज कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। डायबिटीज के कारण व्यक्ति का अग्न्याशय (Pancreas) पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता या शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन को ठीक प्रकार से प्रतिक्रिया नहीं देती। ग्लूकोज को अन्य कोशिकाओं तक पहुँचाने का काम इन्सुलिन का होता है और डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन बनना बंद या कम हो जाता है जिस कारण शरीर में चीनी अथवा ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है। आज के समय में तो डायबिटीज होना बहुत ही आम बात है। सिर्फ अधिक उम्र के लोगों में ही नहीं आज के समय में बच्चे भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे है। एक समय था जब 40-50 साल की उम्र के बाद ही डायबिटीज जैसी बीमारियाँ हुआ करती है लेकिन अब अनुचित जीवनशैली और लाइफस्टाइल के कारण छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आज के समय में पूरे विश्व में लगभग 350 मिलियन लोग इस बीमारी से पीड़ित है और अगले कुछ वर्षों में यह संख्या दुगनी हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मधुमेह दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों की इसके प्रति जागरुकता बढ़े। 

डायबिटीज या मधुमेह क्या होता है (What is Diabetes in hindi)




आयुर्वेद में डायबिटीज को मधुमेह कहा गया है। अनुचित आहार-विहार, व्यायाम न करना, शारीरिक श्रम कम करना, अत्यधिक तनाव आदि इन सब कारणों से व्यक्ति के त्रिदोष वात, पित्त और कफ असन्तुलित हो जाते है और मधुमेह रोग को जन्म देते है। वैसे तो मधुमेह में तीनो दोषों में असंतुलन देखा जाता है परन्तु मुख्यत इसमें कफ दोष का प्रभाव मूल होता है तथा अपने ही समान लक्षणों को दर्शाता है इसके अलावा मधुमेह को कुलज विकारों में मुख्य बताया गया है अर्थात् इसका एक कारण अनुवांशिकता भी है यदि परिवार में किसी सदस्य को या माता-पिता को मधुमेह रोग चला आ रहा हो तो इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

डायबिटीज होने का कारण (Causes of Diabetes)

हमारे शरीर में पैनक्रियास नामक ग्रन्थि के ठीक से काम न करने या फिर पूरी तरह से काम न करने पर डायबिटीज होने के खतरा बढ़ जाता है। इसके अन्य भी कारण हो सकते है पर पैनक्रियास ग्रन्थि का सबसे बड़ा कारण होता है। हमारी पैनक्रयास ग्रन्थि से विभिन्न हार्मोन्स निकलते है, इनमें मुख्य है इन्सुलिन और ग्लूकॉन। इंसुलिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है, इसकी वजह से हमारे रक्त में हमारी कोशिकाओं को शुगर मिलती है। इन्सुलिन शरीर के अन्य भागें में शुगर पहुँचाने का काम करता है।

इंसुलिन हार्मोन का कम निर्माण होना। जब इंसुलिन हार्मोन हमारे शरीर में कम बनता है, तो कोशिकाओं की ऊर्जा कम होने लगती है और इसी कारण से शरीर को नुकसान पहुँचने लगता है। जैसे- बेहोशी आना। दिल की धड़कन तेज होना आदि।

इंसुलिन के कम निर्माण के कारण रक्त में शुगर अधिक हो जाती है क्योंकि जब इंसुलिन कम बनता है तो कोशिकाओं तक और रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है और यह मूत्र के जरिए निकलने लगता है। इसी कारण डायबिटीज के मरीज को बार-बार पेशाब आती है।

डायबिटीज होने में अनुवांशिकता भी एक कारण है। यदि परिवार के किसी सदस्य माँ-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

मोटापा भी डायबिटीज के लिए जिम्मेदार होता है, नियमित रुप से जंक फूड खाने, कम पानी पीने, एक्सरसाइज न करने, खाने के बाद तुरंत सो जाने, आरामपरस्त जीवन जीने और व्यायाम न करने वाले लोगों में डायबिटीज होने की संभावना अधिक है।

वर्तमान में बच्चों में होने वाली डायबिटीज का मुख्य कारण आजकल का रहन-सहन और खान-पान है। आजकल बच्चे शारीरिक रुप से निक्रिय रहते है और अधिक देर तक टी.वी. या वीडियो गेम्स खेलने में समय व्यतीत करते है जिस कारण डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा रहता है। इससे बचने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरुरी है।

डायबिटीज के प्रकार (Types of Diabetes)

टाइप-1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes)-

डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन का निर्माण आवश्यकता से कम होता है। इस अवस्था को बाहर से इन्सुलिन देकर नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें रोगी का अग्न्याशय या पैनक्रियास की बीटा कोशिकाएँ इन्सुलिन नहीं बना पाती जिसका उपचार लगभग असम्भव है। यह प्रकार बच्चों को एवं 18-20 साल तक के युवाओं को प्रभावित करता है।

टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes)-

रोगी का शरीर इन्सुलिन का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसमें शरीर इन्सुलिन बनाता तो है लेकिन कम मात्रा में और कई बार वह इन्सुलिन अच्छे से काम नहीं करता। टाइप-1 डायबिटीज को उपचार और उचित खानपान से नियंत्रित किया जा सकता है। यह डायबिटीज वयस्कों को होता है।

डायबिटीज होने के लक्षण (Symptoms of Diabetes)

डायबिटीज में शरीर का ग्लूकोज बढ़ने के साथ और भी लक्षण महसूस या दृष्टिगोचर होते हैं वह इसप्रकार हैं-

अधिक भूख एवं प्यास लगना।अधिक पेशाब आना।हमेशा थका महसूस करना ।वजन बढ़ना या कम होना।त्वचा में खुजली होना या अन्य त्वचा संबंधी समस्याएँ होना।उल्टी का मन होना।मुँह सूखना।बाहरी संक्रमण के प्रति शरीर संवेदनशील हो जाता है।नेत्र संबंधी समस्याएँ जैसे- धुंधला दिखना।अधिक पेशाब आने से शरीर निर्जलित हो जाता है जिस कारण बार-बार प्यास लगती है।
कोई घाव होने पर उसके ठीक होने में समय लगता है। डायबिटीज में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक तरह से काम नहीं करती।महिलाओं में अक्सर योनि में कैंडिड इंफेक्शन होने को खतरा रहता है।
रक्त में अतिरिक्त चीनी से तंत्रिका क्षतिग्रस्त हो सकता है। व्यक्ति अपने हाथ और पैरों में झनझनाहट महसूस करता है साथ ही हाथ-पैरों में दर्द एवं जलन हो सकती है।डायबिटीज में व्यक्ति की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे कि मसूड़ें में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और मसूड़े कमजोर होकर दाँत ढीले हो सकते है। निर्जलीकरण के कारण मुँह में शुष्कता रहती है।


डायबिटीज से बचने के उपाय (How to prevent Diabetes)

1.सब्जियों में करेला, ककड़ी, खीरा, टमाटर, शलजम, लौकी, तुरई, पालक, मेथी, गोभी यह सब खाना चाहिए। आलू और शकरकन्द का सेवन नहीं करना चाहिए।

2.फलों में सेब, अनार, संतरा, पपीता, जामुन, अमरुद का सेवन करें इसके विपरीत आम, केला, लीची, अंगूर इस प्रकार के मीठे फल कम से कम खाने चाहिए।

3.सूखे मेवों में बादाम, अखरोट, अंजीर खाएँ। किशमिश, छुआरा, खजूर इनका सेवन न करें।

4.चीनी, शक्कर, गुड़, गन्ने का रस, चॉकलेट इनका सेवन बिल्कुल न करें।

5.एक बार में अधिक भोजन न करें बल्कि भूख लगने पर थोड़े मात्रा में भोजन करें।

6.डायबिटीज के रोगी को प्रतिदिन आधा घंटा सैर करनी चाहिए और व्यायाम करना चाहिए।

7.प्रतिदिन प्राणायाम करना चाहिए तथा जितना हो सके तनावयुक्त जीवन जीना चाहिए।


डायबिटीज कंट्रोल करने के घरेलू उपाय (Home remedies for Diabetes)
डायबिटीज को नियंत्रण में लाने के लिए कुछ घरेलू इलाज कारगर होते हैं। जैसे -

डायबिटीज के इलाज में फायदेमंद तुलसी (Tulsi help to treat Diabetes)

तुलसी में मौजूद एन्टीऑक्सिडेंट और जरुरी तत्व शरीर में इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते है। डायबिटीज के रोगी को रोज दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट खाने चाहिए।

डायबिटीज के उपचार में लाभकारी अमलतास (Amaltas help to control Diabetes)

अमलतास की कुछ पत्तियाँ धोकर उनका रस निकालें। इसका एक चौथाई कप प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से फायदा मिलता है।

डायबिटीज के इलाज में फायदेमंद सौंफ (Fennel seed help to get relief from Diabetes)

नियमित तौर पर भोजन के बाद सौंफ खाएँ। सौंफ खाने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है।

डायबिटीज में फायदेमंद करेला (Bitter gourd help to treat Diabetes)

करेले का जूस शुगर की मात्रा को कम करता है। डायबिटीज को नियंत्रण में लाने के लिए करेले का जूस नियमित रुप से पीना चाहिए।
(सुबह खाली पेट टमाटर, खीरा और करेले का जूस मिलाकर पिएँ।)

डायबिटीज को नियंत्रण करने में सहायक अलसी के बीज (Flaxseed help to get relief from Diabetes)

सुबह खाली पेट अलसी का चूर्ण गरम पानी के साथ लें। अलसी में प्रचुर मात्रा मे फाइबर पाया जाता है जिस कारण यह फैट और शुगर का उचित अवशोषणा करने में सहायक होता है। अलसी के बीज डायबिटीज के मरीज की भोजन के बाद की शुगर को लगभग 28 प्रतिशत तक कम कर देते हैं।

डायबिटीज के इलाज में लाभकारी मेथी (Fenugreek help to control Diabetes)

मेथी के दानें को रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर खाली पेट इस पानी को पिएँ और मेथी के दानों को चबा लें। नियमित रुप से इसका सेवन करने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है।

डायबिटीज में लाभकारी गेंहूँ (Wheat help to control Diabetes)

गेहूँ के ज्वार का आधा कप ताजा रस रोज सुबह-शाम पीने से डायबिटीज में लाभ होता है।

डायबिटीज के इलाज में फायदेमंद जामून (Jambolan help to ease Diabetes)

जामुन के फल में काला नमक लगाकर खाने से रक्त में शुगर की मात्रा नियत्रित रहती है।

डायबिटीज में लाभकारी दालचीनी (Cinnamon help to treat Diabetes)

रक्त में शुगर के स्तर को कम रखने के लिए एक महीने तक अपने प्रतिदिन के आहार में एक ग्राम दालचीनी का प्रयोग करें.

आंवले का रस डायबिटीज में फायदेमंद ( Amla juice helps to control Diabetes)

10 मि.ग्रा. आँवले के जूस को 2 ग्रा. हल्दी के पाउडर में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें।

डायबिटीज में लाभकारी ग्रीन टी ( Green tea helps to control Diabetes)
ग्रीन टी में पॉलिफिनॉल्स होते है। यह शुगर को कम करने वाले हाइपोग्लिसेमिक तत्व होते है। इससे ब्लड शुगर को मुक्त करने में सहायता मिलती है और शरीर इन्सुलिन का बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर पाता है।


नीलबदरी डायबिटीज के इलाज फायदेमंद (Bilberry help to relieve from Diabetes)

आयुर्वेद में नीलबदरी के पत्तों का उपयोग डायबिटीज के उपचार के लिए सदियों से होता आ रहा है।जरमोल ऑफ न्यूट्रिशन Germoul of nutrition के अनुसार इसकी पत्तियों में एंथोसाइनिडाइन्स काफी मात्रा में होते है जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाने की प्रक्रिया को बेहतर करता है।

सहिजन का पत्ता डायबिटीज में लाभकारी (Leaves of hoarse radish good for Diabetes)

सहिजन के पत्तों का सेवन करने से डायबिटीज के रोगियों में भोजन का पाचन बेहतर होता है और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।


डायबिटीज को नियंत्रित रखने में सहायक है पतंजलि दिव्य मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर


पतंजलि आयुर्वेद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पतंजलि दिव्य मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर में निम्न सामग्रियां मौजूद हैं.

.गिलोय (Tinosporacordifolia)
.करेला (Momordicacharantia)
.बेल पत्र (Aegle marmelos)
.गुडमार (Gymnemasylvestre)
.छोटी हरड (Terminal ia chebula)
.गोखरू (Tribululsterrestris)
.वट जटा (Ficusbengalensis)
..हल्दी (Curcuma longa)
.मेथी (Trigonellafoenum- graecum)
.कुटज छाल (Holarrhen a – antidysenterica)
.नीम पत्र (Azadirachtandica)
.अश्वगंधा (Withaniasomnifera)
.बहेड़ा (Terminalia belerica)
.कालमेघ (Andographicspaniculata)
.काचुर (Curcuma zedoaria)
.नीम (Azadirachtaindica)
.आंवला (Emblica officinalis)
.शिलाजीत (Asphaltum)
.जामुन (Syzygiumcumini)
.काली जीरा (Centratherumanthel minticum)
.चिरायता (Swertiachirata)
.कुटकी (Picrorhizakurroa)
.बबूल (Acacia Arabica)
.कुचला (Strychnosnux- vomica)
.आतिश (Aconitum heterophyllum)
.परवल पिष्टी (Praval Pishti)
.वांग भस्म (Vang Bhasma)
.लौह भस्म (Lauh Bhasma)

अधिक जानकारी के लिए fallow link पतंजलि 




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